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मऊ की संस्कृति में समाहित बुनाई कला
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    मऊ और बुनाई कला एक दूसरे के पूरक हैं। मऊ आज उत्कर्ष एवं समृद्धि के जिस पायदान पर खड़ा है, उसका आधार बुनकर ही हैं। साडि़यों की बुनाई यहाँ के नागरिकों की पहचान बन चुकी है। बुनाई कला इस क्षेत्र के आबो-हवा में घुलकर यहाँ की संस्कृति में समाहित हो चुकी है।

    इस क्षेत्र में बुनाई का उद्भव मुगल सम्राट जहाँगीर काल में हुआ। जैसे-जैसे समय बीतता गया यह कला फलते-फूलते स्थानीय अल्पसंख्यकों की परम्परागत कला के रूप में विख्यात हुई। पूर्वी उत्तर प्रदेश में हथकरघा से कपड़ा बुनने की शुरूआत मऊ से ही हुई और धीरे-धीरे अन्य शहरों में फैलती गयी। मऊ में इसका प्रारम्भ 16वीं शताब्दी से माना जाता है। उस समय यहाँ तानसेन नामक बुनकर ने करघे पर बहुत ही सुन्दर कपड़े का उत्पादन किया था। धीरे-धीरे अन्य लोगों ने यह हुनर सीखा और आज तो यह यहाँ का गृह उद्योग है। नगर अथवा आस-पास के मुस्लिम परिवारों में शायद ही कोई ऐसा घर हो जिसमें आधुनिक शक्तिचालित करघा न लगा हो। एक अनुमान के अनुसार नगर में लगभग 85 हजार लूम चल रहे हैं। इसके अलावा कोपागंज, अदरी, पूराघाट, घोसी, मधुबन, मुहम्मदाबाद गोहना, खुरहट, खैराबाद, करहां, पिपरीडीह, बहादुरगंज, मुबारकपुर आदि क्षेत्रों को मिला दिया जाये तो लाखों करघे दिन-रात चलते हैं।

    मऊ की बनी साडि़यों की देश-विदेश में अलग पहचान है। साडि़यों पर आकर्षक व कलात्मक कढ़ाई देखते ही बनती है। अपने आकर्षण के आगे बनारसी साडि़याँ का मुकाबला करने वाली साडि़याँ सर्वसाधारण के लिए सुलभ है। साडि़यों के अतिरिक्त विभिन्न प्रदेशों जैसे-असम, बंगाल महाराष्ट्र आदि के पारम्परिक परिधान भी यहाँ निर्मित होते हैं। उल्लेखनीय है कि 1957 में यहाँ आये प्रधानमंत्री पं0 जवाहर लाल नेहरू यहाँ की कला एवं वस्त्रोद्योग की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए भारत का मैनचेस्टर कहा था। बहुत हद तक इस क्षेत्र के बुनकरों ने अपनी लगन व मेहनत से नेहरू जी के सपने को साकार किया। यहाँ की बहुसंख्य आबादी बुनाई का कार्य करती है। यह कार्य पीढ़ी दर पीढ़ी करते आ रहे लोगों की आजीविका का एकमात्र साधन भी है। इस कला के कारण ही यहाँ बेरोजगारी भी अपेक्षाकृत कम है तथा लोग खुशहाल भी है।

    मऊनाथ भंजन के रघुनाथपुरा, मुंशीपुरा, खीरीबाग, कियारी टोला, भिखारीपुर, बुलाकीपुरा, पठानटोला, प्यारेपुरा, मिर्जाहादीपुरा, डोमनपुरा, इस्लामपुरा, जमालपुरा, मदनपुरा, मलिकताहिर पुरा, कासिमपुरा, हसनमखासानी, हट्ठीमदारी, मुगलपुरा, दक्षिण टोला, अलाउद्दीनपुरा, इमामगंज, हरिकेशपुरा आदि मुहल्ले बुनाई के साधन केन्द्र है।