ताज़ा खबर
जिले के बारे में
पूर्वी उत्तर प्रदेश का सुप्रसिद्ध एवं औद्योगिक दृष्टि से समुन्नत जनपद मऊ का इतिहास काफी पुराना है। रामायण एवं महाभारत कालीन सांस्कृतिक एवं पुरातत्विक अवशेष इस भू-भाग में यत्र-तत्र मिलते हैं। यद्यपि इस दिशा में वैज्ञानिक ढंग से शोध एवं उत्खनन के प्रयास नहीं किये गये ह, लेकिन भौगोलिक एवं ऐतिहासिक साक्ष्यों तथा किवंदतियों के आधार पर इसकी पुष्टि होती है। कहा जाता है कि त्रेतायुग में महाराज दशरथ के शासनकाल में इस स्थान पर ऋषियों की तपोभूमि थी। इसी तमसा तट पर आदि कवि महर्षि वाल्मिकी का आश्रम था। यह तो निर्विवाद है कि वन यात्रा के समय प्रथम रात्रि तमसा तट पर श्री रामचन्द्र जी ने विश्राम किया था। मऊ का ज्ञात अभिलेखीय इतिहास लगभग 1500 वर्ष पुराना है, जब यह समूचा इलाका घोर घना जंगल था। यहाँ बहने वाली नदी के आस-पास जंगली व आदिवासी जातियाँ निवास करती थीं। यहाँ के सबसे पुराने निवासी नट माने जाते है। इस इलाके पर उन्हीं का शासन भी था।
अपने जिले को जाने
हमारे ज़िले की सुंदरता, संस्कृति और विरासत को जानें
ताजा अपडेट & सूचना
- प्रदर्शित करने के लिए कोई पोस्ट नहीं
- प्रदर्शित करने के लिए कोई पोस्ट नहीं
- प्रदर्शित करने के लिए कोई पोस्ट नहीं
हेल्पलाइन सम्पर्क
नागरिक सेवाएँ
फोटो गैलरी
नई वंदेवी मंदिर कोहिनौर मऊ के झील के दृश्य
भारत माता का मूर्ति मुक्तिधाम दोहरीघाट
देवताओं का मंदिर , मुक्तिधाम दोहरीघाट
माता की मूर्ति वंदेवी मंदिर कोहिनौर मऊ
मुक्तिधाम
सार्वजनिक उपयोगिताएँ

